अथर्ववेद (कांड 5)
अव॑ जहि यातु॒धाना॒नव॑ कृत्या॒कृतं॑ जहि । अथो॒ यो अ॒स्मान्दिप्स॑ति॒ तमु॒ त्वं ज॑ह्योषधे ॥ (२)
हे ओषधि! तुम याततुधानों अर्थात् राक्षसों और कृत्या का निर्माण करने वाले का विनाश करो. तुम उस का भी विनाश करो जो हमारी मृत्यु की इच्छा करता है. (२)
O medicine! You destroy the creator of the demons and the act. Destroy him who desires our death. (2)