हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.14.7

कांड 5 → सूक्त 14 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 14
यदि॒ वासि॑ दे॒वकृ॑ता॒ यदि॑ वा॒ पुरु॑षैः कृ॒ता । तां त्वा॒ पुन॑र्णयाम॒सीन्द्रे॑ण स॒युजा॑ व॒यम् ॥ (७)
हे कृत्या! यदि तुझे देवों ने अथवा पुरुषों ने प्रेरित किया है तो हम तुझे उन्हीं की ओर वापस लौटाते हैं, क्योंकि हम इंद्र के सखा हैं. (७)
O act! If you have been inspired by gods or men, we return you to them, because we are indra's friends. (7)