अथर्ववेद (कांड 5)
अग्ने॑ पृतनाषा॒ट्पृत॑नाः सहस्व । पुनः॑ कृ॒त्यां कृ॑त्या॒कृते॑ प्रति॒हर॑णेन हरामसि ॥ (८)
हे राक्षसों की सेना का सामना करने वाले अग्नि देव! तुम इन सेनाओं का सामना करो. हम इस कृत्या को कृत्या के प्रेरक की ओर ही वापस लौटा रहे हैं. (८)
O Agni God facing the army of demons! You face these armies. We are returning this act to the motivator of the act. (8)