अथर्ववेद (कांड 5)
कृत॑व्यधनि॒ विद्य॒ तं यश्च॒कार॒ तमिज्ज॑हि । न त्वामच॑क्रुषे व॒यं व॒धाय॒ सं शि॑शीमहि ॥ (९)
हे संहार का साधन कृत्या! जिस ने तेरा निर्माण किया है, तू उसी का छेदन कर के मार डाल. जिस ने तेरा निर्माण नहीं किया है, उस के वध के निमित्त हम तुझे शक्तिशालिनी नहीं बनाते. (९)
O act of destruction! He who created you, pierce him and kill him. We do not make you powerful for the slaughter of him who has not created you. (9)