हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.17.11

कांड 5 → सूक्त 17 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
पु॑न॒र्दाय॑ ब्रह्मजा॒यां कृ॒त्वा दे॒वैर्नि॑किल्बि॒षम् । ऊर्जं॑ पृथि॒व्या भ॒क्त्वोरु॑गा॒यमुपा॑सते ॥ (११)
हम देवों द्वारा स्वच्छ किए हुए शक्तिदायक अन्न का विभाग कर के ब्राह्मण पत्नी को देते हैं तथा अत्यधिक कीर्तिशाली परमात्मा की उपासना करते हैं. (११)
We take care of the powerful food cleaned by the gods and give it to the Brahmin wife and worship the highly glorious God. (11)