हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.17.13

कांड 5 → सूक्त 17 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
न वि॑क॒र्णः पृ॒थुशि॑रा॒स्तस्मि॒न्वेश्म॑नि जायते । यस्मि॑न्रा॒ष्ट्रे नि॑रु॒ध्यते॑ ब्रह्मजा॒याचि॑त्त्या ॥ (१३)
जिस राज्य में ब्राह्मण की पत्नी को अचेत कर के रोका जाता है, उस राज्य में विशाल मस्तक वाले पुरुष जन्म नहीं लेते. (१३)
In a state where a Brahmin's wife is stopped by unconscious, men with huge heads are not born in that state. (13)