हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.17.8

कांड 5 → सूक्त 17 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
उ॒त यत्पत॑यो॒ दश॑ स्त्रि॒याः पूर्वे॒ अब्रा॑ह्मणाः । ब्र॒ह्मा चे॒द्धस्त॒मग्र॑ही॒त्स ए॒व पति॑रेक॒धा ॥ (८)
ब्राह्मण की पत्नी के पूर्व अब्राह्मण बालक चाहे दस हों, पर जो ब्राह्मण उस का पाणि ग्रहण करता है, वही उस का पति होता है. (८)
The Brahmin's wife may have ten abrahman children, but the Brahmin who receives her pani is her husband. (8)