हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.19.11

कांड 5 → सूक्त 19 → मंत्र 11 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 19
नवै॒व ता न॑व॒तयो॒ या भूमि॒र्व्य॑धूनुत । प्र॒जां हिं॑सि॒त्वा ब्राह्म॑णीमसंभ॒व्यं परा॑भवन् ॥ (११)
जिन आठ सौ दस पुरुषों से धरती कांपती थी, वे ब्राह्मण की संतान की हिंसा कर के असंभव पराजय को प्राप्त हुए. (११)
The eight hundred and ten men from whom the earth trembled, they attained the impossible defeat by violence against the brahmin's children. (11)