हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.19.9

कांड 5 → सूक्त 19 → मंत्र 9 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 19
तं वृ॒क्षा अप॑ सेधन्ति च्छा॒यां नो॒ मोप॑गा॒ इति॑ । यो ब्रा॑ह्म॒णस्य॒ सद्धन॑म॒भि ना॑रद॒ मन्य॑ते ॥ (९)
हे नारद! जो ब्राह्मण के धन को अपना धन समझता है, उस से वृक्ष भी द्वेष मानते हैं और उसे अपनी छाया में नहीं आने देना चाहते. (९)
O Narada! Trees also consider the brahmin's wealth as their wealth and do not want it to come under their shadow. (9)