अथर्ववेद (कांड 5)
धी॒भिः कृ॒तः प्र व॑दाति॒ वाच॒मुद्ध॑र्षय॒ सत्व॑ना॒मायु॑धानि । इन्द्र॑मेदी॒ सत्व॑नो॒ नि ह्व॑यस्व मि॒त्रैर॒मित्राँ॒ अव॑ जङ्घनीहि ॥ (८)
हे दुदुंभि! कुशलतापूर्वक बजाने पर तू मोहक शब्द निकालती है. शक्तिशाली मनुष्यों के आयुधों को ऊंचा कर के तू उन्हें प्रसन्न बना. तू वीरों का आह्वान करती हुई हमारे मित्रों द्वारा हमारे शत्रुओं का विनाश करा, क्योंकि तू इंद्र की प्रिया है. (८)
O milk! When played efficiently, you remove seductive words. You make them happy by raising the arms of powerful men. You invoke the heroes and destroy our enemies through our friends, because you are the beloved of Indra. (8)