हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.22.13

कांड 5 → सूक्त 22 → मंत्र 13 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
तृती॑यकं वितृती॒यं स॑द॒न्दिमु॒त शा॑र॒दम् । त॒क्मानं॑ शी॒तं रू॒रं ग्रैष्मं॑ नाशय॒ वार्षि॑कम् ॥ (१३)
हे देव! तिजारी, चौथइया, वर्षा संबंधी, शरद, ग्रीष्मकाल में होने वाले ज्वर के साथसाथ शीत ज्वर का विनाश करो. (१३)
O God! Destroy tijari, chauthia, rain related, autumn, summer fever as well as cold fever. (13)