अथर्ववेद (कांड 5)
तृती॑यकं वितृती॒यं स॑द॒न्दिमु॒त शा॑र॒दम् । त॒क्मानं॑ शी॒तं रू॒रं ग्रैष्मं॑ नाशय॒ वार्षि॑कम् ॥ (१३)
हे देव! तिजारी, चौथइया, वर्षा संबंधी, शरद, ग्रीष्मकाल में होने वाले ज्वर के साथसाथ शीत ज्वर का विनाश करो. (१३)
O God! Destroy tijari, chauthia, rain related, autumn, summer fever as well as cold fever. (13)