हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.22.2

कांड 5 → सूक्त 22 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
अ॒यं यो विश्वा॒न्हरि॑तान्कृ॒णोष्यु॑च्छो॒चय॑न्न॒ग्निरि॑वाभिदु॒न्वन् । अधा॒ हि त॑क्मन्नर॒सो हि भू॒या अधा॒ न्य॑ङ्ङध॒राङ् वा॒ परे॑हि ॥ (२)
हे देह को नष्ट कर देने वाले ज्वर! तू सभी मनुष्यों को संताप देता है. इसलिए तू तिरस्कृत, निर्बल एवं अधम स्थान को चला जा. (२)
O fever that destroys the body! You annoy all human beings. So go to the despised, weak and inferior place. (2)