हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.22.8

कांड 5 → सूक्त 22 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 22
म॑हावृ॒षान्मूज॑वतो॒ बन्ध्व॑द्धि प॒रेत्य॑ । प्रैतानि॑ त॒क्मने॑ ब्रूमो अन्यक्षे॒त्राणि॒ वा इ॒मा ॥ (८)
हम मूंज वाले एवं अधिक वर्षा वाले स्थानों पर जाने के लिए ज्वर से निवेदन करते हैं कि तू वहां जा कर अथवा अन्य स्थानों पर जा कर वहां की वस्तुओं का भक्षण कर. (८)
We request fever to go to places with moong and high rainfall, that you should go there or go to other places and eat the things there. (8)