अथर्ववेद (कांड 5)
ह॒तो येवा॑षः॒ क्रिमी॑णां ह॒तो न॑दनि॒मोत । सर्वा॒न्नि म॑ष्म॒षाक॑रं दृ॒षदा॒ खल्वाँ॑ इव ॥ (८)
तीव्रगामी कृमि मेरी मंत्र शक्ति से नष्ट हो गए. नदमिना नाम के कीड़ों को मैं ने इस प्रकार पीस डाला है, जिस प्रकार चने पत्थरों से पीसे जाते हैं. (८)
The fast-moving worms were destroyed by my mantra power. I have grinded insects named Nadmina in such a way that gram is brewed with stones. (8)