अथर्ववेद (कांड 5)
ओते॑ मे॒ द्यावा॑पृथि॒वी ओता॑ दे॒वी सर॑स्वती । ओतौ॑ म॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒ क्रिमिं॑ जम्भयता॒मिति॑ ॥ (१)
द्यावा पृथ्वी, सरस्वती देवी, इंद्र और अग्नि मुझ में ओतप्रोत हैं. वे कृमियों का विनाश करें. (१)
Dyava Prithvi, Saraswati Devi, Indra and Agni are imbued in me. Let them destroy the worms. (1)
अथर्ववेद (कांड 5)
अ॒स्येन्द्र॑ कुमा॒रस्य॒ क्रिमी॑न्धनपते जहि । ह॒ता विश्वा॒ अरा॑तय उ॒ग्रेण॒ वच॑सा॒ मम॑ ॥ (२)
हे धन के स्वामी इंद्र! इस बालक के शत्रु रूप कृमियों का विनाश करो. इन्हें मेरे उग्र वचनों के साथ पूरी तरह नष्ट करो. (२)
O Swami of Wealth Indra! Destroy the enemy form of this child, the worms. Destroy them completely with My fiery words. (2)
अथर्ववेद (कांड 5)
यो अ॒क्ष्यौ॑ परि॒सर्प॑ति॒ यो नासे॑ परि॒सर्प॑ति । द॒तां यो मद्यं॒ गच्छ॑ति॒ तं क्रिमिं॑ जम्भयामसि ॥ (३)
जो कृमि आंखों में घूमते हैं जो नाखूनों में चलतेफिरते हैं तथा जो दांतों के मध्य निवास करते हैं, उन कृमियों को हम नष्ट करते हैं. (३)
We destroy the worms that move in the eyes, which move in the nails and those who live between the teeth. (3)
अथर्ववेद (कांड 5)
सरू॑पौ॒ द्वौ विरू॑पौ॒ द्वौ कृ॒ष्णौ द्वौ रोहि॑तौ॒ द्वौ । ब॒भ्रुश्च॑ ब॒भ्रुक॑र्णश्च॒ गृध्रः॒ कोक॑श्च॒ ते ह॒ताः ॥ (४)
दो समान रूप वाले, दो भिन्न रूप वाले, दो काले, दो लाल रंग के, एक खाकी रंग वाला, एक खाकी रंग के कान वाला, एक गिद्ध और कोक-हम इन सभी कृमियों को मंत्र की शक्ति से नष्ट करते हैं. (४)
Two identical, two different forms, two black, two red, one khaki-colored, one khaki-eared, one vulture and coke — we destroy all these worms with the power of mantras. (4)
अथर्ववेद (कांड 5)
ये क्रिम॑यः शिति॒कक्षा॒ ये कृ॒ष्णाः शि॑ति॒बाह॑वः । ये के च॑ वि॒श्वरू॑पा॒स्तान्क्रिमी॑न् जम्भयामसि ॥ (५)
जो कृमि तीखी कोख वाले हैं, जो काले हैं, जो तीखी भुजाओं वाले एवं जो अनेक रूपों वाले हैं, उन सब को हम मंत्र की शक्ति से नष्ट करते हैं. (५)
We destroy all the worms that are sharp-eyed, those who are black, those who have sharp arms and those who are of many forms, with the power of mantras. (5)
अथर्ववेद (कांड 5)
उत्पु॒रस्ता॒त्सूर्य॑ एति वि॒श्वदृ॑ष्टो अदृष्ट॒हा । दृ॒ष्टांश्च॒ घ्नन्न॒दृष्टां॑श्च॒ सर्वां॑श्च प्रमृ॒णन्क्रिमी॑न् ॥ (६)
सभी को दिखाई देने वाले सूर्य अदृश्य कृमियों को नष्ट करते हैं. वे दृश्य और अदृश्य कृमियों को नष्ट करते हुए पूर्व दिशा से उदय हो रहे हैं. (६)
The sun visible to all destroys invisible worms. They are rising from the east, destroying visible and invisible worms. (6)
अथर्ववेद (कांड 5)
येवा॑षासः॒ कष्क॑षास एज॒त्काः शि॑पवित्नु॒काः । दृ॒ष्टश्च॑ ह॒न्यतां॒ क्रिमि॑रु॒तादृष्ट॑श्च हन्यताम् ॥ (७)
हे इंद्र! तुम शीघ्र गमन करने वाले, कष्ट देने वाले, कंपित करने वाले, तीक्ष्ण कृमि, दिखाई देने वाले अथवा दिखाई न देने वाले सभी कृमियों को नष्ट करो. (७)
O Indra! Destroy all worms that move quickly, torment, torment, to stagger, to sharp worms, to be visible or not visible. (7)
अथर्ववेद (कांड 5)
ह॒तो येवा॑षः॒ क्रिमी॑णां ह॒तो न॑दनि॒मोत । सर्वा॒न्नि म॑ष्म॒षाक॑रं दृ॒षदा॒ खल्वाँ॑ इव ॥ (८)
तीव्रगामी कृमि मेरी मंत्र शक्ति से नष्ट हो गए. नदमिना नाम के कीड़ों को मैं ने इस प्रकार पीस डाला है, जिस प्रकार चने पत्थरों से पीसे जाते हैं. (८)
The fast-moving worms were destroyed by my mantra power. I have grinded insects named Nadmina in such a way that gram is brewed with stones. (8)