अथर्ववेद (कांड 5)
स॑वि॒ता प्र॑स॒वाना॒मधि॑पतिः॒ स मा॑वतु । अ॒स्मिन्ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन्कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां । चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑ ॥ (१)
सविता सभी उत्पन्न पदार्थो के अधिपति हैं. वे इस ब्रह्म कर्म में, इस पुरोधा में, इस संकल्प में, इस देवाहूवान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में मेरी रक्षा करें. (१)
Savita is the ruler of all the products. May they protect me in this Brahma Karma, in this forefather, in this resolution, in this divine deed and in the form of blessings. (1)