हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.24.10

कांड 5 → सूक्त 24 → मंत्र 10 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 24
च॒न्द्रमा॒ नक्ष॑त्राणा॒मधि॑पतिः॒ स मा॑वतु । अ॒स्मिन्ब्रह्म॑ण्य॒स्मिन्कर्म॑ण्य॒स्यां पु॑रो॒धाया॑म॒स्यां प्र॑ति॒ष्ठाया॑म॒स्यां चित्त्या॑म॒स्यामाकू॑त्याम॒स्यामा॒शिष्य॒स्यां दे॒वहू॑त्यां॒ स्वाहा॑ ॥ (१०)
चंद्रमा नक्षत्रों के अधिपति हैं. वह इस वेदोक्त पौरोहित्य कर्म में, प्रतिष्ठा में, संकल्प में. देवाहूवान कर्म में तथा आशीर्वाद रूप कर्म में रूप में मेरी रक्षा करें. (१०)
Moon is the ruler of the constellations. He is in this Vedokta Paurohitya karma, in prestige, in resolve. Protect me in karma and blessings in karma. (10)