अथर्ववेद (कांड 5)
गर्भं॑ धेहि सिनीवालि॒ गर्भं॑ धेहि सरस्वति । गर्भं॑ ते अ॒श्विनो॒भा ध॑त्तां॒ पुष्क॑रस्रजा ॥ (३)
हे सिनीवाली एवं सरस्वती! मेरे गर्भ को पुष्ट बनाओ. फूलों की माला धारण करने वाले अश्विनीकुमार मेरे गर्भ की रक्षा करें. (३)
O Siniwali and Saraswati! Make my womb strong. May Ashwinikumar, who wears a garland of flowers, protect my womb. (3)