हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 25
पर्व॑ताद्दि॒वो योने॒रङ्गा॑दङ्गात्स॒माभृ॑तम् । शेपो॒ गर्भ॑स्य रेतो॒धाः सरौ॑ प॒र्णमि॒वा द॑धत् ॥ (१)
पर्वत की ओषधि, स्वर्ग के पुण्य और अंगों की शक्ति से पुष्ट वीर्य धारण करने वाला पुरुष जल में पत्ते के समान गर्भाधान करता है. (१)
A man who holds semen strengthened by the medicinal of the mountain, the virtue of heaven and the power of the organs insemination like a leaf in water. (1)

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 25
यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही भू॒तानां॒ गर्भ॑माद॒धे । ए॒वा द॑धामि ते॒ गर्भं॒ तस्मै॒ त्वामव॑से हुवे ॥ (२)
जिस प्रकार विशाल पृथ्वी सभी भूतों अर्थात्‌ प्राणियों का गर्भ धारण करती हैं, उसी प्रकार मैं तेरा गर्भ धारण करती हूं और उस की रक्षा के निमित्त तुझे बुलाती हूं. (२)
Just as the vast earth conceives all ghosts, that is, creatures, so I conceive you and call you to protect it. (2)

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 25
गर्भं॑ धेहि सिनीवालि॒ गर्भं॑ धेहि सरस्वति । गर्भं॑ ते अ॒श्विनो॒भा ध॑त्तां॒ पुष्क॑रस्रजा ॥ (३)
हे सिनीवाली एवं सरस्वती! मेरे गर्भ को पुष्ट बनाओ. फूलों की माला धारण करने वाले अश्विनीकुमार मेरे गर्भ की रक्षा करें. (३)
O Siniwali and Saraswati! Make my womb strong. May Ashwinikumar, who wears a garland of flowers, protect my womb. (3)

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 25
गर्भं॑ ते मि॒त्रावरु॑णौ॒ गर्भं॑ दे॒वो बृह॒स्पतिः॑ । गर्भं॑ त॒ इन्द्र॑श्चा॒ग्निश्च॒ गर्भं॑ धा॒ता द॑धातु ते ॥ (४)
मित्र, वरुण, बृहस्पति देव, इंद्र, अग्नि और धाता देव तेरे गर्भ को पुष्ट करें. (४)
Friends, Varuna, Brihaspati Dev, Indra, Agni and Dhata Dev strengthen your womb. (4)

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 25
विष्णु॒र्योनिं॑ कल्पयतु॒ त्वष्टा॑ रू॒पाणि॑ पिंशतु । आ सि॑ञ्चतु प्र॒जाप॑तिर्धा॒ता गर्भं॑ दधातु ते ॥ (५)
विष्णु तेरी योनि की कल्पना करें, त्वष्टा तेरे रूप की रचना करें, प्रजापति तेरा सिंचन करें और धाता तेरे गर्भ को पुष्ट करें. (५)
Vishnu, imagine your vagina, tvashta create your form, Prajapati cleanse you and dhata strengthen your womb. (5)

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 25
यद्वेद॒ राजा॒ वरु॑णो॒ यद्वा॑ दे॒वी सर॑स्वती । यदिन्द्रो॑ वृत्र॒हा वेद॒ तद्ग॑र्भ॒कर॑णं पिब ॥ (६)
राजा वरुण, देवी सरस्वती एवं वृत्र नाशक इंद्र जिस गर्भपोषक वस्तु को जानते हैं, उसे तू पी ले. (६)
You should drink the umbilical object that King Varuna, Goddess Saraswati and Vritra Destroyer Indra know. (6)

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 25
गर्भो॑ अ॒स्योष॑धीनां॒ गर्भो॒ वन॒स्पती॑नाम् । गर्भो॒ विश्व॑स्य भू॒तस्य॒ सो अ॑ग्ने॒ गर्भ॒मेह धाः॑ ॥ (७)
हे अग्नि! तुम ओषधियों के, वनस्पतियों के तथा सभी प्राणियों के गर्भ हो. अतएव तुम मेरे गर्भ को पुष्ट करो. (७)
O agni! You are the womb of medicines, plants and all beings. So you strengthen my womb. (7)

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 25
अधि॑ स्कन्द वी॒रय॑स्व॒ गर्भ॒मा धे॑हि॒ योन्या॑म् । वृषा॑सि वृष्ण्यावन्प्र॒जायै॒ त्वा न॑यामसि ॥ (८)
हे वृषणों अथवा अंडकोषों वाले! तू वर्षण अर्थात्‌ सेचन करता है. तू योनि में गर्भ स्थापित कर. तू ऊपर हो कर चलता हुआ वीरता का प्रदर्शन कर. हम तुझे प्रजा के निमित्त ग्रहण करते हैं. (८)
O testes or testicles! You do the precipitation i.e. the sale. You install the womb in the vagina. You walk up and display bravery. We receive you for the sake of the people. (8)
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