अथर्ववेद (कांड 5)
गर्भो॑ अ॒स्योष॑धीनां॒ गर्भो॒ वन॒स्पती॑नाम् । गर्भो॒ विश्व॑स्य भू॒तस्य॒ सो अ॑ग्ने॒ गर्भ॒मेह धाः॑ ॥ (७)
हे अग्नि! तुम ओषधियों के, वनस्पतियों के तथा सभी प्राणियों के गर्भ हो. अतएव तुम मेरे गर्भ को पुष्ट करो. (७)
O agni! You are the womb of medicines, plants and all beings. So you strengthen my womb. (7)