अथर्ववेद (कांड 5)
एयम॑गन्ब॒र्हिषा॒ प्रोक्ष॑णीभिर्य॒ज्ञं त॑न्वा॒नादि॑तिः॒ स्वाहा॑ ॥ (६)
यह अदितिदेवी कुशों और प्रोक्षणियों के साथ यज्ञ का वर्णन करती हुई आई है. (६)
This Aditidevi has been describing the yajna with kushas and prokshanis. (6)
कांड 5 → सूक्त 26 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation