हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.27.6

कांड 5 → सूक्त 27 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 27
त॒री म॒न्द्रासु॑ प्र॒यक्षु॒ वस॑व॒श्चाति॑ष्ठन्वसु॒धात॑रश्च ॥ (६)
देवों की संगति करने वाले एवं हर्ष उत्पन्न करने वाले यज्ञों में तारक और धन को बढ़ाने वाले वरुण देवता निवास करते हैं. (६)
Varun Devta, who associates with the gods and creates happiness, resides in the yagyas, which increase tarak and wealth. (6)