अथर्ववेद (कांड 5)
द्वारो॑ दे॒वीरन्व॑स्य॒ विश्वे॑ व्र॒तं र॑क्षन्ति वि॒श्वहा॑ ॥ (७)
अग्नि की तेजस्विनी लपटें यजमान के व्रत की सभी प्रकार से रक्षा करती हैं. (७)
The bright flames of agni protect the fast of the host in all ways. (7)
कांड 5 → सूक्त 27 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation