हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.28.7

कांड 5 → सूक्त 28 → मंत्र 7 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 28
त्र्या॑यु॒षं ज॒मद॑ग्नेः क॒श्यप॑स्य त्र्यायु॒षम् । त्रे॒धामृत॑स्य॒ चक्ष॑णं॒ त्रीण्यायूं॑षि तेऽकरम् ॥ (७)
जमदग्नि ऋषि की तीन आयु हैं-बचपन, यौवन और वृद्धावस्था. महर्षि कश्यप की भी यही तीन अवस्थाएं हैं. अमृत के निदर्शन रूप में तीनों आयु मैं तुझे देता हूं. (७)
There are three ages of Jamadagni Rishi - childhood, youth and old age. Maharishi Kashyap also has these three stages. I give you all three ages as a demonstration of nectar. (7)