हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.29.14

कांड 5 → सूक्त 29 → मंत्र 14 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 29
ए॒तास्ते॑ अग्ने स॒मिधः॑ पिशाच॒जम्भ॑नीः । तास्त्वं जु॑षस्व॒ प्रति॑ चैना गृहाण जातवेदः ॥ (१४)
हे अग्नि! तुम्हारी ये समिधाएं पिशाचों को नष्ट करने वाली हैं. हे जातवेद! इन समिधाओं को प्राप्त कर के तुम प्रसन्न बनो. (१४)
O agni! These samidhas of yours are going to destroy vampires. O Jataved! Be happy by getting these facilities. (14)