अथर्ववेद (कांड 5)
ता॑र्ष्टा॒घीर॑ग्ने स॒मिधः॒ प्रति॑ गृह्णाह्य॒र्चिषा॑ । जहा॑तु क्र॒व्याद्रू॒पं यो अ॑स्य मां॒सं जिही॑र्षति ॥ (१५)
हे अग्नि! तृषा शांत करने वाली इन समिधाओं को घी के साथ ग्रहण करो. जो राक्षस इस पुरुष के मांस की इच्छा करता है, वह अपने कार्य से विमुख हो जाए. (१५)
O agni! Take these samidhas with ghee that calm the trisha. The demon who desires the flesh of this man should turn away from his work. (15)