अथर्ववेद (कांड 5)
इ॒हैधि॑ पुरुष॒ सर्वे॑ण॒ मन॑सा स॒ह । दू॒तौ य॒मस्य॒ मानु॑ गा॒ अधि॑ जीवपु॒रा इ॑हि ॥ (६)
हे पुरुष! तू यमराज के दूतों का अनुकरण मत कर अर्थात् मर मत. तू अपने समस्त परिवार जनों के साथ यहां जीवित रह. (६)
O man! Do not follow the messengers of Yamraj, that is, do not die. You live here with all your family members. (6)