हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.30.6

कांड 5 → सूक्त 30 → मंत्र 6 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 30
इ॒हैधि॑ पुरुष॒ सर्वे॑ण॒ मन॑सा स॒ह । दू॒तौ य॒मस्य॒ मानु॑ गा॒ अधि॑ जीवपु॒रा इ॑हि ॥ (६)
हे पुरुष! तू यमराज के दूतों का अनुकरण मत कर अर्थात्‌ मर मत. तू अपने समस्त परिवार जनों के साथ यहां जीवित रह. (६)
O man! Do not follow the messengers of Yamraj, that is, do not die. You live here with all your family members. (6)