अथर्ववेद (कांड 5)
मा बि॑भे॒र्न म॑रिष्यसि ज॒रद॑ष्टिं कृणोमि त्वा । निर॑वोचम॒हं यक्ष्म॒मङ्गे॑भ्यो अङ्गज्व॒रं तव॑ ॥ (८)
हे रोगी! तू भय त्याग दे, क्योंकि तू मरेगा नहीं. मैं तुझे वृद्धावस्था तक इस लोक में रहने योग्य बनाता हूं. तेरे शरीर में से यक्ष्मा रोग और अस्थिगत ज्वर दूर हो चुका है. (८)
O patient! Give up fear, for you will not die. I enable you to live in this world till your old age. Tuberculosis and bone fever have been removed from your body. (8)