अथर्ववेद (कांड 5)
यां ते॑ च॒क्रुरा॒मे पात्रे॒ यां च॒क्रुर्मि॒श्रधा॑न्ये । आ॒मे मां॒से कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम् ॥ (१)
हे कृत्या! अभिचार करने वाले ने मिट्टी के कच्चे पात्र में चावल, जौ, गेहूं, उपवाक, तिल एवं कांगनी के मिले हुए अन्नों में अथवा मुरगे आदि के मांसों में तुझे स्थित किया है. मैं तुझे उसी की ओर लौटाता हूं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (१)
O act! The person who meditates has placed you in the raw vessel of soil in the grains mixed with rice, barley, wheat, upwak, sesame and kangni or in the meat of murga etc. I return you to him who sent you. (1)
अथर्ववेद (कांड 5)
यां ते॑ च॒क्रुः कृ॑क॒वाका॑व॒जे वा॒ यां कु॑री॒रिणि॑ । अव्यां॑ ते कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम् ॥ (२)
हे कृत्या! अभिचारकर्ता ने तुझे मुरगे अथवा बकरे के मांस में अथवा पेड़ पर स्थित किया है. मैं तुझे उसी की ओर लौटाता हूं, जिस ने तुझे अभिचार कर के भेजा है. (२)
O act! The agent has placed you in the flesh of a chicken or a goat or on a tree. I return you to him who sent you. (2)
अथर्ववेद (कांड 5)
यां ते॑ च॒क्रुरेक॑शफे पशू॒नामु॑भ॒याद॑ति । ग॑र्द॒भे कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम् ॥ (३)
हे कृत्या! अभिचारकर्ता ने तुझे एक शाफ अर्थात् टाप वाले और दोनों ओर दांतों वाले (घोड़े या गधे) पशु पर स्थित किया है. हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (३)
O act! The agent has placed you on a schaaf i.e. topped and toothed (horse or donkey) animal on either side. We return you to him who sent you. (3)
अथर्ववेद (कांड 5)
यां ते॑ च॒क्रुर॑मू॒लायां॑ वल॒गं वा॑ नरा॒च्याम् । क्षेत्रे॑ ते कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम् ॥ (४)
हे कृत्या! अभिचारकर्ता ने तुझे मनुष्यों द्वारा पूजित खाने के पदार्थ में ढक कर खेत में स्थित किया है. हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (४)
O act! The Agent has covered you in food items worshipped by humans and placed you in the field. We return you to him who sent you. (4)
अथर्ववेद (कांड 5)
यां ते॑ च॒क्रुर्गार्ह॑पत्ये पूर्वा॒ग्नावु॒त दु॒श्चितः॑ । शाला॑यां कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम् ॥ (५)
हे कृत्या! अभिचार करने वाले ने तुझे गार्हपत्य अग्नि में अथवा यज्ञशाला में स्थित किया है. हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (५)
O act! The one who practices abhichar has placed you in the agni of garhapatya or in the yagyashala. We return you to him who sent you. (5)
अथर्ववेद (कांड 5)
यां ते॑ च॒क्रुः स॒भायां॒ यां च॒क्रुर॑धि॒देव॑ने । अ॒क्षेषु॑ कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम् ॥ (६)
हे कृत्या! अभिचार करने वाले ने तुझे सभा में अथवा जुआ खेलने के पासों में स्थित किया है. हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (६)
O act! The one who practiced has located you in the meeting or in the nearest of gambling. We return you to him who sent you. (6)
अथर्ववेद (कांड 5)
यां ते॑ च॒क्रुः सेना॑यां॒ यां च॒क्रुरि॑ष्वायु॒धे । दु॑न्दु॒भौ कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम् ॥ (७)
हे कृत्या! अभिचार करने वाले ने तुझे सेना में, बाण पर अथवा दुदुंभि पर स्थित किया है. हम तुझे उसी की ओर लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (७)
O act! The one who commits the act has placed you in the army, on the arrow or on the dudumbhi. We return you to him who sent you. (7)
अथर्ववेद (कांड 5)
यां ते॑ कृ॒त्यां कूपे॑ऽवद॒धुः श्म॑शा॒ने वा॑ निच॒ख्नुः । सद्म॑नि कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम् ॥ (८)
हे कृत्या! अभिचार करने वाले ने तुझे कुएं में, श्मशान में अथवा घर में स्थित किया है. हम तुझे उसी की और लौटाते हैं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (८)
O act! The one who meditates has placed you in the well, in the crematorium or in the house. We return you to him who sent you. (8)