हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.31.1

कांड 5 → सूक्त 31 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 31
यां ते॑ च॒क्रुरा॒मे पात्रे॒ यां च॒क्रुर्मि॒श्रधा॑न्ये । आ॒मे मां॒से कृ॒त्यां यां च॒क्रुः पुनः॒ प्रति॑ हरामि॒ ताम् ॥ (१)
हे कृत्या! अभिचार करने वाले ने मिट्टी के कच्चे पात्र में चावल, जौ, गेहूं, उपवाक, तिल एवं कांगनी के मिले हुए अन्नों में अथवा मुरगे आदि के मांसों में तुझे स्थित किया है. मैं तुझे उसी की ओर लौटाता हूं, जिस ने अभिचार कर के तुझे भेजा है. (१)
O act! The person who meditates has placed you in the raw vessel of soil in the grains mixed with rice, barley, wheat, upwak, sesame and kangni or in the meat of murga etc. I return you to him who sent you. (1)