हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 5.7.8

कांड 5 → सूक्त 7 → मंत्र 8 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 5)

अथर्ववेद: | सूक्त: 7
उ॒त न॒ग्ना बोभु॑वती स्वप्न॒या स॑चसे॒ जन॑म् । अरा॑ते चि॒त्तं वीर्त्स॒न्त्याकू॑तिं॒ पुरु॑षस्य च ॥ (८)
हे अराति! तू मनुष्यों की कामनाओं को असफल करता है तथा उन्हें सदा प्रभाव के रूप में प्राप्त होता है. (८)
O Arati! You fail the desires of men and always receive them as effects. (8)