अथर्ववेद (कांड 5) अथर्ववेद: 5.9.3 | सूक्त: 9 अ॒न्तरि॑क्षाय॒ स्वाहा॑ ॥ (३) आकाश के अधिष्ठाता देव के लिए हमारी यह हवि समर्पित है. (३) This is our devotion to the Presiding Deity of the Sky. (3)