हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.103.3

कांड 6 → सूक्त 103 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 103
अ॒मी ये युध॑मा॒यन्ति॑ के॒तून्कृ॒त्वानी॑क॒शः । इन्द्र॒स्तान्पर्य॑हा॒र्दाम्ना॒ तान॑ग्ने॒ सं द्या॒ त्वम् ॥ (३)
हमारे प्रति प्रसन्न बने हुए इंद्र देव और अग्नि देव हमारे उन शत्रुओं को बंधन में बांधें. (३)
May Indra Dev and Agni Dev, who are happy with us, bind those enemies of ours in bondage. (3)