हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.108.3

कांड 6 → सूक्त 108 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 108
यां मे॒धामृ॒भवो॑ वि॒दुर्यां मे॒धामसु॑रा वि॒दुः । ऋष॑यो भ॒द्रां मे॒धां यां वि॒दुस्तां मय्या वे॑शयामसि ॥ (३)
ऋभु नाम के देव जिस मेधा को जानते थे, जिस मेधा को राक्षस जानते थे तथा वसिष्ठ आदि ऋषि वेद शास्त्र विषयक जिस मेधा को जानते थे, उसे हम अपने में स्थापित करते हैं. (३)
We establish in ourselves the medha that the god named Ribhu knew, the medha that the demons knew and the wisdom that Vasishtha etc. rishis knew about The Vedas. (3)