हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.11.2

कांड 6 → सूक्त 11 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 11
पुं॒सि वै रेतो॑ भवति॒ तत्स्त्रि॒यामनु॑ षिच्यते । तद्वै पु॒त्रस्य॒ वेद॑नं॒ तत्प्र॒जाप॑तिरब्रवीत् ॥ (२)
पुरुषमय बीजरूप वीर्य होता है. वह गर्भाधान कर्म के द्वारा नारी के गर्भाशय में डाला जाता है. वही पुत्र प्राप्ति का साधन बनता है. यह पुंसवन कर्म प्रजापति ने बताया है. (२)
Male seed form is semen. She is inserted into the woman's uterus by conception. He becomes the means of getting a son. This has been told by Punsavan Karma Prajapati. (2)