अथर्ववेद (कांड 6)
उन्मु॑ञ्च॒ पाशां॒स्त्वम॑ग्न ए॒षां त्रय॑स्त्रि॒भिरुत्सि॑ता॒ येभि॒रास॑न् । स ग्राह्याः॒ पाशा॒न्वि चृ॑त प्रजा॒नन्पि॑तापु॒त्रौ मा॒तरं॑ मुञ्च॒ सर्वा॑न् ॥ (२)
हे अग्नि! माता, पिता और पुत्र को वेदना के दोष रूपी पाश बंधनों से छुड़ाओ. वेदना के दोष उत्तम, मध्यम और अधम-तीन प्रकार के हैं. हे अग्नि! तुम इस को छुड़ाने के उपाय जानते हो, इसलिए पकड़ने वाली पिशाची के बंधन की रस्सियां छुड़ाओ. इस के बंधन छुड़ाने के लिए तुम्हें सभी देव अनुमति दें. (२)
O agni! Free the mother, father and son from the loop bonds of the guilt of pain. There are three types of pain defects, good, medium and half-hearted. O agni! You know how to get rid of it, so release the ropes of the bondage of the holding vampire. Allow all the gods to redeem the bondage of this. (2)