अथर्ववेद (कांड 6)
उद॑गातां॒ भग॑वती वि॒चृतौ॒ नाम॒ तार॑के । प्रेहामृत॑स्य यच्छतां॒ प्रैतु॑ बद्धक॒मोच॑नम् ॥ (३)
विचृत अर्थात् मूल नक्षत्र में उदय या उत्पन्न होने वाली विचृत नाम की तारिकाएं इस बंधे हुए पुरुष को मरने से बचाएं तथा साथ ही बंधन से मुक्त करें. (३)
The stars of the name Vichrit, which rise or arise in the original nakshatra, save this tied man from dying and at the same time free him from bondage. (3)