हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.134.2

कांड 6 → सूक्त 134 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 134
अध॑रोऽधर॒ उत्त॑रेभ्यो गू॒ढः पृ॑थि॒व्या मोत्सृ॑पत् । वज्रे॒णाव॑हतः शयाम् ॥ (२)
अधिक ऊंचों की अपेक्षा, अतिशय अधोगति वाला एवं धरती में छिपा हुआ धरती से बाहर न निकले, वह इस वज्र के द्वारा घायल हो कर सोता रहे. (२)
Instead of higher heights, do not come out of the earth with extreme degradation and hidden in the earth, he should sleep injured by this thunderbolt. (2)