हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.134.3

कांड 6 → सूक्त 134 → मंत्र 3 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 134
यो जि॒नाति॒ तमन्वि॑च्छ॒ यो जि॒नाति॒ तमिज्ज॑हि । जि॑न॒तो व॑ज्र॒ त्वं सी॒मन्त॑म॒न्वञ्च॒मनु॑ पातय ॥ (३)
हे वञ्र! जो शत्रु हमें हानि पहुंचाता है, उसी के समीप जा. जो हमें हानि पहुंचाता है, उसी को मार. जो शत्रु हमें हानि पहुंचाता है, तू उस के शरीर के भागों को विदीर्ण कर. (३)
O vanra! Go close to the enemy who harms us. Kill the one who harms us. The enemy who harms us, you scatter the parts of his body. (3)