अथर्ववेद (कांड 6)
क्लीब॑ क्ली॒बं त्वा॑करं॒ वध्रे॒ वध्रिं॑ त्वाकर॒मर॑सार॒सं त्वा॑करम् । कु॒रीर॑मस्य शी॒र्षणि॒ कुम्बं॑ चाधि॒निद॑ध्मसि ॥ (३)
हे पीले पत्तों वाली एवं कल्याण करने वाली जड़ीबूटी! तू वशीकरण करने वाली है. तू फलों से युक्त हो कर उस नारी को मेरे समीप आने की प्रेरणा दे. इस के पश्चात मुझ कामुक और कामिनी को मिला दे. (३)
O yellow leafy and well-being herb! You are going to vashikaran. May you be full of fruits and inspire that woman to come close to me. After this, mix me erotic and kamini. (3)