अथर्ववेद (कांड 6)
यथो॑द॒कमप॑पुषोऽप॒शुष्य॑त्या॒स्य᳡म्। ए॒वा नि शु॑ष्य॒ मां कामे॒नाथो॒ शुष्का॑स्या चर ॥ (४)
हे कामिनी! जिस प्रकार जल न पीने वालों का मुंह सूख जाता है, उसी प्रकार तू मेरे प्रति काम भावना से संतप्त हो. तू सूखे मुंह वाली बन कर मेरे समीप आ. (४)
Hey Kamini! As the mouth of those who do not drink water becomes dry, so you be fed up with the spirit of desire. You come close to me with a dry mouth. (4)