अथर्ववेद (कांड 6)
यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धार॒ पर्व॑तान्गि॒रीन् । ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे ॥ (३)
हे नारी! जिस प्रकार यह विशाल पृथ्वी पर्वतों को धारण करती है, उसी प्रकार तेरा गर्भ भी प्रसव के समय जन्म लेने के लिए स्थित रहे. (३)
O woman! Just as this vast earth holds mountains, so your womb should also be located to be born at the time of delivery. (3)