हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.17.4

कांड 6 → सूक्त 17 → मंत्र 4 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 17
यथे॒यं पृ॑थि॒वी म॒ही दा॒धार॒ विष्ठि॑तं॒ जग॑त् । ए॒वा ते॑ ध्रियतां॒ गर्भो॒ अनु॒ सूतुं॒ सवि॑तवे ॥ (४)
हे नारी! यह विशाल पृथ्वी जिस प्रकार चराचर जगत्‌ को धारण करती है. उसी प्रकार तेरा गर्भ भी प्रसव के समय जन्म लेने के लिए स्थित रहे. (४)
O woman! The way this huge earth holds the grazing world. In the same way, your womb should also be located to be born at the time of delivery. (4)