हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.21.1

कांड 6 → सूक्त 21 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 21
इ॒मा यास्ति॒स्रः पृ॑थि॒वीस्तासां॑ ह॒ भूमि॑रुत्त॒मा । तासा॒मधि॑ त्व॒चो अ॒हं भे॑ष॒जं समु॑ जग्रभम् ॥ (१)
ये जो पृथ्वी आदि तीन लोक हैं, उन में यह पृथ्वी उत्तम है, जिस पर हम स्थित हैं. पृथ्वी की त्वचा के समान ऊपर वर्तमान जो भूमि है, मैं उस पर उत्पन्न ओषधियों का संग्रह करता हूं. (१)
This earth is the best among the three worlds on which we are located. Like the skin of the earth, I collect the medicines produced on the present land above. (1)