हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.24.2

कांड 6 → सूक्त 24 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 24
यन्मे॑ अ॒क्ष्योरा॑दि॒द्योत॒ पार्ष्ण्योः॒ प्रप॑दोश्च॒ यत् । आप॒स्तत्सर्वं॒ निष्क॑रन्भि॒षजां॒ सुभि॑षक्तमाः ॥ (२)
जो रोग मेरी आंखों को व्यथित करते हैं, जो मेरे घुटनों और जांघों में आश्रय लेते हैं, व्याधि विनाशकों में कुशल दिव्य जल उन सब को नष्ट करें. (२)
May the divine water skilled in the evil destroyers that disturb my eyes, which take shelter in my knees and thighs. (2)