हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.27.1

कांड 6 → सूक्त 27 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 27
देवाः॑ क॒पोत॑ इषि॒तो यदि॒छन्दू॒तो निरृ॑त्या इ॒दमा॑ज॒गाम॑ । तस्मा॑ अर्चाम कृ॒णवा॑म॒ निष्कृ॑तिं॒ शं नो॑ अस्तु द्वि॒पदे॒ शं चतु॑ष्पदे ॥ (१)
हे देवो! पाप देवता द्वारा भेजा गया दूत कबूतर हम को पीड़ित करने की इच्छा करता हुआ हमारे घर आया है. उसे लौटाने के लिए हम हवि के द्वारा तुम्हारी अर्चना करते हैं. हमारे दुपायों अर्थात्‌ उत्तराधिकारियों और चौपायों अर्थात्‌ पशुओं का कल्याण हो. (१)
O God! The messenger pigeon sent by the sin god has come to our house wishing to afflict us. To return it, we worship you through Havi. Let the welfare of our dupas i.e. heirs and chaupayas i.e. animals. (1)