हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.39.2

कांड 6 → सूक्त 39 → मंत्र 2 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 39
अच्छा॑ न॒ इन्द्रं॑ य॒शसं॒ यशो॑भिर्यश॒स्विनं॑ नमसा॒ना वि॑धेम । स नो॑ रास्व रा॒ष्ट्रमिन्द्र॑जूतं॒ तस्य॑ ते रा॒तौ य॒शसः॑ स्याम ॥ (२)
सामने वर्तमान, यश देने वाले एवं अधिक यशस्वी इंद्र को हम नमस्कार आदि के द्वारा पूजते हुए उन की सेवा करते हैं. हे इंद्र! तुम हमें अपने द्वारा प्रेरित राज्य प्रदान करो. तुम्हारे उस दान से हम यशस्वी बनें. (२)
In front of us, we serve the present, fame-giving and more successful Indra by worshiping him through namaskar etc. O Indra! You provide us with the kingdom inspired by you. May we be successful with that donation of yours. (2)