अथर्ववेद (कांड 6)
इ॒दं तृ॒तीयं॒ सव॑नं कवी॒नामृ॒तेन॒ ये च॑म॒समैर॑यन्त । ते सौ॑धन्व॒नाः स्वरानशा॒नाः स्विष्टिं नो अ॒भि वस्यो॑ नयन्तु ॥ (३)
तृतीय सवन नाम का यह सोम याग उन ऋभुओं का है, जिन्होंने अपने शिल्प कर्म से चमस की रचना की थी. आंगिरस के पुत्र वे सुधन्वा रथ, चमस आदि बनाने के कारण देवत्व को प्राप्त हुए हैं. वे ऋभु उत्तम फल का ध्यान कर के हम को यज्ञ पूर्ति का अधिकारी बनाएं. (३)
This Som Yag named Tritiya Sawan belongs to the Ribhus who composed Chamas with their craft deeds. The son of Angiras, he has attained divinity due to making Sudhanva Ratha, Chamas etc. They should make us the right to fulfill the yajna by meditating on the best fruits. (3)