हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.51.1

कांड 6 → सूक्त 51 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 51
वा॒योः पू॒तः प॒वित्रे॑ण प्र॒त्यङ्सोमो॒ अति॑ द्रु॒तः । इन्द्र॑स्य॒ युजः॒ सखा॑ ॥ (१)
वायु से संबंधित दशापवित्र के द्वारा शोधित सोमरस मुख से चल कर नाभि देश में पहुंचता है. वह इंद्र का योग्य मित्र है. (१)
Someras, treated by the air-related decoction, walks from the mouth and reaches the navel country. He is a worthy friend of Indra. (1)