हरि ॐ

अथर्ववेद (Atharvaved)

अथर्ववेद 6.59.1

कांड 6 → सूक्त 59 → मंत्र 1 - संस्कृत मंत्र, हिंदी अर्थ और English translation

अथर्ववेद (कांड 6)

अथर्ववेद: | सूक्त: 59
अ॑न॒डुद्भ्य॒स्त्वं प्र॑थ॒मं धे॒नुभ्य॒स्त्वम॑रुन्धति । अधे॑नवे॒ वय॑से॒ शर्म॑ यच्छ॒ चतु॑ष्पदे ॥ (१)
हे सहदेवी नाम की ओषधि! तुम सब से पहले गाड़ी खींचने में समर्थ मेरे बैलों को सुख दो. इस के पश्चात तुम मेरी दुधारू गायों को सुखी बनाओ. मेरी गायों के अतिरिक्त तुम पांच वर्ष की अवस्था वाले नए बैल, घोड़े आदि चौपायों को भी सुख प्रदान करो. (१)
O medicine named Sahadevi! First of all, give pleasure to my bulls capable of pulling the cart. After this, you make my milch cows happy. In addition to my cows, you should also give happiness to new bulls, horses, etc. of five years of age. (1)